प्रलाप @ मूर्ख दिवस
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१) ईश्वर ने पहले
बुद्धिमानों का आविष्कार किया
और फिर बुद्धिमानों को,
सदा बुद्धिमान बनाये रखने के लिए
मूर्खो का ...|
२) उनके मुँह से
अपने लिए “मूर्ख” सुनना
तारीफ़ में गढ़ा गया
कसीदा सा लगता है |
‘धूर्तों’ के मुँह से
अक्लमंद कहलाना
अपने लिए “भद्दी गाली” है ...||
३) मूर्ख और बुद्धिमान के बीच
एक ही कसौटी है
“भाग्य”....|
हर भाग्यशाली ‘मूर्ख’
‘बुद्धिमान’ है
और
अभागा ‘बुद्धिमान’..
‘मूर्ख’ |||
४) ‘मूर्ख’ से बड़ा परोपकारी
कोई दूसरा नहीं है |
जो स्वयं दुःख उठाकर
दूसरों को यह सीख देता है
कि उन्हें “क्या” नहीं करना है ||||
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१) ईश्वर ने पहले
बुद्धिमानों का आविष्कार किया
और फिर बुद्धिमानों को,
सदा बुद्धिमान बनाये रखने के लिए
मूर्खो का ...|
२) उनके मुँह से
अपने लिए “मूर्ख” सुनना
तारीफ़ में गढ़ा गया
कसीदा सा लगता है |
‘धूर्तों’ के मुँह से
अक्लमंद कहलाना
अपने लिए “भद्दी गाली” है ...||
३) मूर्ख और बुद्धिमान के बीच
एक ही कसौटी है
“भाग्य”....|
हर भाग्यशाली ‘मूर्ख’
‘बुद्धिमान’ है
और
अभागा ‘बुद्धिमान’..
‘मूर्ख’ |||
४) ‘मूर्ख’ से बड़ा परोपकारी
कोई दूसरा नहीं है |
जो स्वयं दुःख उठाकर
दूसरों को यह सीख देता है
कि उन्हें “क्या” नहीं करना है ||||

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